100 प्रतिशत दृष्टि दिव्यांग शिक्षक आधारसिंह चौहान राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित
केन्द्रीय मंत्री डॉ. थावरचन्द गेहलोत और रामदास अठावले की विशेष उपस्थिति में उपराष्ट्पति श्री एम.के. वेंकैया नायडु ने मेडल और प्रशस्ति पत्र देकर किया सम्मानित
राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने पीठ थपथपाकर की आधारसिंह के कार्यों की सराहना
इन्दौर। इन्दौर के 100 प्रतिशत दृष्टि दिव्यांग शिक्षक आधारसिंह चौहान को दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार ने दृष्टि दिव्यांग श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ कर्मचारी के लिए सम्मानित किया। वे मध्यप्रदेश के एक मात्र दृष्टि दिव्यांग शिक्षक हैं, जिन्हें वर्ष 2019 का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। विश्व विकलांग दिवस पर राजधानी नईदिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित एक गरिमामय समारोह में भारत के उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु ने केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री श्री थावरचंद गेहलोत, केन्द्रीय आदिमजाति कल्याण मंत्री श्री रामदास अठावले, राज्यमंत्री श्री कृष्णपाल गुर्जर एवं शकुंतला मेडम की विशेष उपस्थिति में आधारसिंह चौहान को मेडल और प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।
राष्ट्रपति भवन में आयोजित भेंटवार्ता में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आधारसिंह चौहान से ना केवल चर्चा की वरन् उनके द्वारा शिक्षण जगत में किए जा रहे कार्यों की खुलेमन से सराहना की और उनकी पीठ थपथपाकर प्रशंसा की। इस मौके पर आधारसिंह चौहान ने कहा कि अध्ययन और अध्यापन मेरे प्रिय विषय हैं और मैं इसे जीवन पर्यंत जारी रखना चाहता हूँ।
उल्लैखनीय है कि 59 वर्षीय श्री आधारसिंह चौहान 6 वर्ष की आयु से 100 प्रतिशत दृष्टि दिव्यांग है। इन्होंने इतिहास में एमए तथा एम.फिल. किया है व मध्यप्रदेश सरकार के शिक्षा विभाग में सहायक शिक्षक के रूप में कार्यरत् है। वे एक खिलाड़ी भी हैं और 1981 से 1987 तक लगातार 8 वर्ष तक उत्कृष्ट एथलीट रहे हैं। दृष्टि दिव्यांगों के सशक्तिकरण हेतु सामाजिक गतिविधियों में शामिल है। उनकी कार्यकलापों और उपलब्धि के लिए उन्हेंं विभिन्न संगठनों से कई पुरस्कार मिले हैं। इसी को ध्यान में रखकर सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने आधारसिंह चौहान को दिव्य दिव्यांग श्रेणी के अन्तर्गत वर्ष 2019 के लिए सर्वश्रेष्ठ कर्मचारी के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया। श्री चौहान वर्तमान में विजय नगर स्थित शासकीय मा. विद्यालय में सहायक शिक्षक के पद पर सेवारत् है और वे विगत तीन दशकों से सामान्य विद्यार्थियों (आँख वाले) को सम्पूर्ण निष्ठा और समर्पण भाव से पढ़ा रहे हैं।