संगठित समाज ही सब समस्याओं का हल है
कि स देश और किस धर्म में हमारा जन्म हो, जन्म तो परमात्मा देते हैं, ऐसा हमारे महापुरुषों ने कहा है। जिस देश-धर्म में हमें परमात्मा ने जन्म दिया है, उस देश और धर्म की उन्नति करनी चाहिए और दूसरों के धर्म को कमजोर नहीं करना चाहिए. यदि विश्व के सभी धर्म इस बात को स्वीकारते हैं तो विश्व में कहीं भी अराजकता नहीं होगी, आतंकवादी घटनाएं नहीं होगी। इस राष्ट्र में सर्व धर्मों का आदर, धार्मिक उपासना की आजादी, लोकतंत्र की गारंटी तब तक ही है, जब तक यहां हिन्दू विचारधारा का प्रभाव है।
अपने समाज की जातियां यह एक व्यवस्था है, परंतु जातिवाद का अहंकार यह उचित नहीं। सब जातियां इस विराट हिन्दू समाज के ही अंग हैं। कोई अंग कमजोर होने पर संपूर्ण समाज कमजोर होता है। हम जानते हैं कि किसी भी जाति के श्रेष्ठ व्यक्ति ने समाज और धर्म के हित के कार्य किए हैं, ऐसे सभी महापुरुषों को पूरे समाज ने आदर दिया है। पूज्य रविदास, पूज्य कबीर, बाल्मीकि जी, श्रद्धेय बी. आर. अंबेडकर इसके प्रमाण हैं। धर्म रक्षा हर जाति का परम धर्म है। यही हम सबकी मूल शक्ति है। हम अपने संपूर्ण समाज को सब भेदभाव समाप्त कर बलशाली करने के प्रयास में लगे है। संगठित समाज ही सब समस्याओं का हल है।
विश्व में किसी भी धर्म-संस्कृति पर विपत्ति आई तो इसी भारत के समाज ने उन्हें शरण दी। यहूदी, पारसी आदि इसके प्रमाण हैं, ऐसे में हमें शरणार्थी और घुसपैठियों में अंतर समझना होगा और पूरे समाज को इससे सजग रहना होगा।
आज जैसे इस राष्ट्र का बल बढ़ रहा है, वहीं राष्ट्र विरोधी शक्तियां अपने समाज को कमजोर करने के लिए, तोडऩे के लिए प्रयास कर रही हैं। हमें इन सभी से सावधान रहना होगा। ये शक्तियां अपने आस्था केंद्रों पर अपनी श्रद्धाओं को समाप्त करने का षड्यंत्र करेंगी, जिन आस्थाओं को लेकर आज तक हमने अमरता प्राप्त की है।
संगठित समाज ही सब समस्याओं का हल है