विभिन्न रहवासी संघों के प्रतिनिधियों ने परिचर्चा में रखे विचार
बड़े बुजुर्गों को अकेलेपन से बचाने के लिए डे-केयर सेन्टर जरूरी
इन्दौर। शहर में कई बड़े बुजुर्ग ऐसे हैं जिनसे घर-परिवार में संवाद करने वाला कोई नहीं है और वे अकेलेपन के शिकार है। यदि ऐसे बुजुर्गों के लिए डे-केयर सेन्टर शुरू किए जाएं तो उनका समय भी अच्छे से कटेगा और वे आनंद भी महसूस करेंगे। ये विचार विभिन्न रहवासी संघों के प्रतिनिधियों (प्रबुद्धजनों) के हैं, जो उन्होंने लोकमान्य नगर स्थित लोकमान्य विद्या निकेतन में आयोजित बुजुर्गों के लिए डे-केयर सेन्टर शुरू किए जाए, विषय पर आयोजित परिचर्चा में व्यक्त किए।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में सेवानिवृत्त अधिकारी श्री नरोत्तमलाल पडवार ने कहा कि जिन परिवारों में पति-पत्नी दोनों ही नौकरी पेशा हैं, और बच्चों के नहीं होने से बुजुर्गों को घर में कुछ समय के लिए अकेले रहने के लिए मजबूर होना पड़ता है, ऐसे में उनकी सुरक्षा की चिंता हमेशा बनी रहती है। ऐेसे बुजुर्गों के लिए डे-केयर सेन्टर ही एक बेहतर समाधान है। सेवानिवृत्त इंजीनियर प्रकाश ढांढेकर ने कहा कि डे-केयर सेन्टर केवल मनोरंजक ही नहीं शैक्षणिक भी होना चाहिए, जहां वे एक-दूसरे को अपने अनुभव साझा कर सके। प्रकाश केलकर ने कहा कि यदि बुजुर्गों के मध्य रचनात्मक गतिविधियां होगी तो वे खुश होंगे। सुष्मा त्रिवेदी ने कहा कि बुजुर्ग स्वयं को हताश एवं निराश नहीं समझे। मुकुंद कुलकर्णी ने कहा कि हमे अधिक से अधिक डे-केयर सेन्टर शुरू करना चाहिए। श्रीमती सुहाष चदावस्कर ने कहा कि डे-केयर सेन्टर में सभी तरह की बुनियादी सुविधाएं होना चाहिए। ओमप्रकाश कानूनगो ने कहा कि डे-केयर सेन्टर को मूर्त रूप देने के लिए अलग-अलग स्तर पर प्रयास जारी है। मोहन मखरीवाल ने कहा कि जब उपदेश पवित्र हो तो लोग जुड़ते हैं। बैठक में अवधेश कुमार शर्मा, दीपा दांडेकर, मनोहर यादव, शशिधर भट्ट, विद्या नान्देडकर, मीनाक्षी नीमगांवकर, ओमप्रकाश तिवड़ेवाल, श्याम पाण्डे ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन ओमप्रकाश कानूनगों ने किया। आभार माना मुकुंद कुलकर्णी ने। मीडिया प्रभारी प्रवीण जोशी ने बताया कि सभी रहवासी संघ चाहते हैं कि शहर के हर कोने में डे-केयर सेन्टर होना चाहिए।