डेवलपमेंट फाउण्डेशन द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति और गांधी दर्शन पर रेड चर्च में परिचर्चा आयोजित
राष्ट्रीय शिक्षा नीति में गांधीजी के एकादश व्रतों को शामिल किया जाए- प्रो. दुबे
संस्कार एवं नैतिक मूल्यों से विद्यार्थियों को बनाए स्वालंबी- पाण्डे
इन्दौर। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में महात्मा गांधी की बुनियादी शिक्षा को शामिल करने की जरूरत है। विद्यार्थी के समग्र विकास के लिए यह आवश्यक है। गांधीजी ने इसके लिए नई तालीम का दर्शन प्रस्तुत किया है। विद्यालयीन शिक्षा में गांधीजी के एकादश वृत्तों का समावेश किया जाए। ये विचार प्रो. पुष्पेन्द्र दुबे के हैं, जो उन्होंने डेवलपमेंट फाउण्डेशन द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति और गांधी दर्शन पर रेड चर्च सभागृह में आयोजित परिचर्चा में व्यक्त किए। प्रो. दुबे ने आगे कहा कि गांधीजी की शिक्षाओं का उल्लेख कर हम शिक्षा को अधिक नैतिक और संस्कारवान बना सकते हैं।
समाजसेवी श्याम पाण्डेय ने कहा कि फाउण्डेशन द्वारा प्रकाशित पत्रिका वार्ता में जिन उद्देश्यों का वर्णन है उन्हें समुचित रूप से त्वरित लागू किया जाना चाहिए। यदि शिक्षा के माध्यम से हमने विद्यार्थियों को सशक्त, संस्कारित, नैतिक एवं स्वावलंबी बना दिया तो यह राष्ट्रीय शिक्षा की सही सार्थकता होगी। श्री पाण्डेय ने आगे कहा कि शिक्षा का बजट बढ़ाए जाने की जरूरत है जैसा दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने अपने यहां बढ़ाया है। आवश्यकता है कि हम राष्ट्री शिक्षा नीति पर समग्र चिंतन करें।
इस मौके पर आलोक खरे ने वार्ता विशेषांक की प्रति पीसब चाको को भेंट की। अतिथि स्वागत मुकुंद कुलकर्णी, आलोक खरे और अतुल कर्णिक ने किया। कार्यक्रम का संचालन वैशाली खरे ने किया। आभार माना फादर पायस ने। इस मौके पर फादर चेरियन, प्रवीण जोशी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।